Swami Vivekananda Complete Collection of Five Yogas | Rajyoga, Bhaktiyoga, Karmayoga, Gyanyoga, Premyoga | Set of 5 Hindi Books by Vivekanand






Price: ₹1,300 - ₹699.00
(as of Mar 12, 2026 11:23:17 UTC – Details)
यह पुस्तकें स्वामी विवेकानंद द्वारा योग के विभिन्न रूपों पर लिखी गई हैं, जो पाठकों को एक समग्र दृष्टिकोण प्रदान करती हैं। निम्नलिखित बिंदुओं के आधार पर यह पुस्तकें पढ़ने योग्य हैं:
योग का गहन ज्ञान: इन पुस्तकों में कर्म योग, राज योग, प्रेम योग, भक्ति योग और ज्ञान योग के माध्यम से योग के विभिन्न पहलुओं को समझाया गया है, जो न केवल शारीरिक बल्कि मानसिक और आत्मिक विकास में सहायक होते हैं।व्यावहारिक जीवन के लिए मार्गदर्शन: यह पुस्तकें केवल सिद्धांत ही नहीं, बल्कि कैसे इन सिद्धांतों को अपने दैनिक जीवन में लागू किया जा सकता है, इसका मार्गदर्शन भी प्रदान करती हैं। योग के माध्यम से जीवन के हर पहलू में संतुलन और शांति प्राप्त की जा सकती है।आध्यात्मिक जागरूकता: स्वामी विवेकानंद की शिक्षाएँ मनुष्य को अपने भीतर की गहराई को समझने, आत्म-साक्षात्कार प्राप्त करने और आध्यात्मिक जागरूकता को बढ़ाने में मदद करती हैं।जीवन की दिशा: कर्म, प्रेम, भक्ति और ज्ञान के माध्यम से यह पुस्तकें हमें सही दिशा में जीवन जीने की प्रेरणा देती हैं। यह हमारे जीवन में सद्गुणों का संचार करती हैं और आत्म-विकास के मार्ग पर चलने के लिए प्रेरित करती हैं।समाज और धर्म का महत्व: स्वामी विवेकानंद ने धर्म के महत्व पर जोर दिया है और इन पुस्तकों में समझाया गया है कि कैसे धर्म और योग समाज और मानव-जाति के विकास में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।
यह पुस्तकें मन, शरीर और आत्मा के संतुलन की दिशा में प्रेरित करती हैं और आध्यात्मिक प्रगति के लिए मार्गदर्शन प्रदान करती हैं। हर योग एक अनमोल रत्न है, जो जीवन के विभिन्न पहलुओं को उजागर करता है और पाठकों को आत्म-ज्ञान की ओर ले जाता है।
9789350486092 | 9789350486085 | 9789389982367 | 9789386850348 | 9789350486078
From the Publisher




ASIN : B09YNXCXNS
Publisher : Prabhat Prakashan Pvt. Ltd.
Publication date : 22 April 2022
Edition : First Edition
Language : Hindi
Print length : 784 pages
Item Weight : 300 g
Dimensions : 28 x 22 x 2 cm
Country of Origin : India
Net Quantity : 5.00 Count
Best Sellers Rank: #10,135 in Books (See Top 100 in Books) #5 in Agnosticism
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